धार जिले के सभी 13 विकासखण्ड 30 जून तक पेयजल अभावग्रस्त घोषितअवैध जल दोहन एवं बोरवेल खनन पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री प्रियंक मिश्रा द्वारा म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 तथा इसके संशोधन अधिनियम 2002 एवं 2023 की धारा-3 के अंतर्गत महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए धार जिले के सभी 13 विकासखण्डों को 30 जून 2026 अथवा पर्याप्त वर्षा होने तक पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार जिले के अतिदोहित विकासखण्डों में धार, नालछा, बदनावर, धरमपुरी एवं तिरला तथा अर्धदोहित विकासखण्ड में मनावर शामिल हैं। इन क्षेत्रों के साथ-साथ जिले के सभी 13 विकासखण्डों में अधिनियम के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
आदेश में पेयजल संकट की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जल स्रोतों के संरक्षण हेतु कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इसके तहत नलकूप, नदी, बांध, नहर, जलधारा, झील, झरना, सोता (स्प्रिंग), जलाशय, एनीकट एवं कुओं जैसे सभी स्रोतों से सिंचाई, औद्योगिक उपयोग या अन्य गैर-घरेलू प्रयोजनों के लिए जल दोहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। केवल पेयजल एवं घरेलू उपयोग के लिए ही जल का उपयोग अनुमन्य होगा।
संशोधित अधिनियम 2002 की धारा-4 (क) एवं (ख) के तहत यह प्रावधान भी किया गया है कि ऐसे जल स्रोत, जिनका अधिग्रहण पेयजल उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, उन्हें अधिग्रहित किया जा सकेगा।
अधिनियम की धारा-6(1) के अंतर्गत जल अभावग्रस्त क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नलकूप या बोरवेल का खनन प्राधिकृत अधिकारी की अनुमति के बिना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। वहीं धारा-6(3) के अनुसार पेयजल एवं घरेलू उपयोग के लिए नलकूप खनन की अनुमति संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी द्वारा प्रदान की जाएगी। अनुमति प्रदान करते समय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (सिविल) क्रमांक 36/2009 में दिए गए निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि जिले के सभी संबंधित अधिकारी उक्त अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें तथा जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाएं।
आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम की धारा-9 के अनुसार प्रथम अपराध के लिए 5 हजार रुपए तक का जुर्माना तथा पुनरावृत्ति की स्थिति में 10 हजार रुपए तक का जुर्माना या अधिकतम 2 वर्ष का कारावास अथवा दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें तथा जल संरक्षण में सहयोग प्रदान करें, ताकि आने वाले समय में पेयजल संकट से बचा जा सके।