ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों का क्लोरिनेशन विशेष अभियान के तहत जारी* *दूषित जल नमूनों का प्राथमिकता से उपचार किया जा रहा
कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा के निर्देशानुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पेयजल स्रोतों में जल जनित बीमारियों की रोकथाम एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष अभियान के तहत क्लोरीनेशन का कार्य सतत रूप से किया जा रहा है। जिले के समस्त विकासखण्डों में स्थापित हैण्डपंपों, कुओं, नल-जल योजनाओं के स्रोतों तथा समूह जल प्रदाय योजनाओं अंतर्गत स्थापित जल शुद्धिकरण संयंत्रों एवं संपवेल में क्लोरीनेशन की कार्यवाही की जा रही है। विभागीय उपयंत्रियों एवं मैदानी अमले द्वारा पेयजल स्रोतों से जल नमूने एकत्रित कर विभागीय जल परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला में दूषित पाए गए जल नमूनों का क्लोरीनेशन प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। विकासखण्ड तिरला की ग्राम पंचायत अड़वी के ग्राम अड़वी में फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल परीक्षण किया गया तथा ग्रामीणों को टोटियाँ लगाने एवं सुरक्षित पेयजल उपयोग के संबंध में समझाईश दी गई। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, रोजगार सहायक, आशा कार्यकर्ता, वाल्वमेन एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत को जल परीक्षण हेतु फील्ड टेस्ट किट एवं रिफिल पैक भी उपलब्ध कराए गए। विकासखण्ड धरमपुरी में जनपद पंचायत कार्यालय में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत की उपस्थिति में विकासखण्ड की समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों को एफ.टी.के. किट के माध्यम से जल परीक्षण करने तथा जल जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु आवश्यक समझाईश दी गई। विकासखण्ड उमरबन की ग्राम पंचायत मिर्जापुर एवं टवलाई बुजुर्ग में नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों का जल परीक्षण किया गया तथा ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं ग्रामवासियों के साथ पेयजल स्रोतों के आसपास सफाई अभियान चलाया गया। साथ ही भविष्य में स्वच्छता बनाए रखने हेतु जागरूक किया गया। विकासखण्ड बदनावर की ग्राम पंचायत नागदा के ग्रामों में हैण्डपंप एवं नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों से जल नमूने एकत्रित कर क्लोरीनेशन की कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त विकासखण्ड नालछा की 57 गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों की समूह जल प्रदाय योजना तथा विकासखण्ड धरमपुरी एवं उमरबन की 125 गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों की समूह जल प्रदाय योजनाओं अंतर्गत स्थापित जल शुद्धिकरण संयंत्रों में सफाई एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की गई।