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किसान कल्याण वर्ष 2026 में नरवाई प्रबंधन, उन्नत यंत्रों का उपयोग एवं धरती माता को सुरक्षित रखें

जिले में इस समय गेहूं एवं अन्य रवि फसलों की कटाई का कार्य प्रारंभ हो गया है अनेक कृ षक फसल कटाई कार्य कंबाइन हार्वेस्टर से कर रहे हैं जिससे कटाई उपरांत खेतों में फसल अवशेष रह जाते हैं विगत वर्षों में फसल शेष अवशेष को जलाने की घटनाएं परिलक्षित हुई है, जिससे वायु प्रदूषण के साथ ही मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव एवं केंचुए मर जाते हैं और भूमि कठोर हो जाती है जिससे खेत की तैयारी में अधिक ऊर्जा एवं समय लगता है साथ ही मृदा के महत्वपूर्ण तत्व (कार्बनिक पदार्थ) भी नष्ट हो जाते है एवं खेत की उपजाऊ क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और दिनों दिन उत्पादकता कम होती जा रही है।

नरवाई जलाने से पशुओं को खिलाने वाला चार भूसा भी जलकर नष्ट हो जाता है जिससे नरवाई जालना किसानों के लिए एक आत्मघाती कदम है। नरवाई जलने से होने वाले वायु प्रदूषण एवं आगजनी की घटनाओं से आमजन के स्वास्थ्य जान माल की सुरक्षा हेतु तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के उद्देश्य से एवं रबी सीजन में नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट धार श्री प्रियंक मिश्रा द्वारा द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।

जारी आदेश अनुसार जिला अंतर्गत फसल कटाई के पश्चात बचाने वाले अवशेष कुंट एवं डंठल (नरवाई) को जलाना पूर्णत प्रतिबंधित किया गया है।नरवाई में आग लगाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिये नरवाई प्रबंधन के यंत्रों जैसे एक्स्ट्रा रीपर, रीपर, रीपर कंबाइंडर, एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, मल्चर, बेलर इत्यादि का उपयोग किया जाना चाहिए। रीपर (ट्रैक्टर चालित /स्वचालित) खड़ी फसल को जड़ के पास से काटकर कतारों में व्यवस्थित रखता है। इससे फसल कटाई शीघ्र व कम लागत में होती है तथा अवशेष प्रबंधन सरल बनता है। स्ट्रा रीपर यह यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर के बाद खेत में बची नरवाई को काटकर भूसा तैयार करता है। इससे अवशेषों का उपयोग पशुचारे के रूप में हो जाता है और जलाने की आवश्यकता कम होती है।

इसी के साथ ही फसल कटाई हेतु कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग किया जाना चाहीए जो दो प्रकार के होते हैं एक जिसमें पुन्नी कंबाइन हार्वेस्टर जिसमे भूसा इकट्ठा होने के लिए ट्राली अटैच होती है फसल कटाई के बाद फसल का भुसा ट्राली में इकटठा होता है। यदी कृषक कटाई के समय उक्त यंत्र का उपयोग नही कर पाये तो फसल अवशेष को तेज धूप के बाद रोटावेटर का उपयोग करके अथवा देशी पाटा चलाकर गेहूं के बचे हुए स्ट्रा को जमीन में मिला सकते हैं। स्ट्रा को जमीन में मिलाने से जमीन की भौतिक दशा एवं कंपोस्टिंग खाद मिलने से जमीन की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है।इसलिए नवाई नहीं जलाने हेतु कृषक बंधुओ से अपील की जाती है कि वर्तमान में पर्यावरण में धरती मां को सुरक्षित रखने मृदा में जीवन से हम कार्बनिक तत्त्व की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से तथा जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान बचाने के उद्देश्य से मिट्टी को सुरक्षित एवं स्वस्थ बनाए रखने हेतु नवाई नहीं जलाई जलाएं उपरोक्त उचित प्रबंधन में यंत्रों का उपयोग करते हुए धरती मां को सुरक्षित रखें।

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